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श्री रामचन्द्र जी की जल समाधि

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श्री रामचन्द्र जी की जल समाधि श्री रामचन्द्र जी की जल समाधि | ramanand sagar | ramayan लव कुश के अयोध्या में आने से राम आश्वस्त थे और उन्होंने समय से ही अपने दोनों बेटो और भाइयो में पुरे विश्व का भू भाग राज करने के लिए बाँट दिया. एक दिन दर्पण में अपना मुख देख उन्हें एहसास हुआ की अब उनका धरती पर आने का समय समाप्त हो चूका है और अब इस देह को छोड़ देना चाहिए इस बाबत उन्होंने नारद द्वारा यमराज को सन्देश भी भिजवाया।।। नारद का सन्देश पा यमराज भी ठिठके लेकिन जो पैदा हुआ है उसे मरना ही होगा ये बाद याद कर वो अयोध्या की तरफ बढे श्रीराम से मिलने. यमराज ने ब्राह्मण का रूप धरा और श्रीराम के कक्ष के बहार पहरा दे रहे लक्ष्मण से राम से मिलने की इच्छा जताई, तब राम उन्हें लेने आये और दोनों बैठ के बात करने लगे. ब्राह्मण रूपी यमराज ने अपना परिचय दिया और राम से कहा की अब में जो आपसे बताने जा रहा हूँ वो अगर कोई भी सुन लेगा तो वो तुरंत मर जायेगा, स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश भी इसे सुन दंड के भागी बन सकते है. इस पर राम लक्ष्मण के पास गए और किसी को भी किसी भी हालत में अंदर न आने देने को कहा और अगर लक्ष...
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अर्जुन और दानवीर कर्ण का कुरुक्षेत्र युद्ध | shree krishna leela | ramanand sagar | mahabharat <iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/jO5_LjPH1JU" frameborder="0" allowfullscreen></iframe> 75 વાર જોવાઈ 6 0 શેર કરો DIL KI AWAZ 19 નવે, 2017 પર પ્રકાશિત કરી છે વિડિઓ સંપાદિત કરો अर्जुन और दानवीर कर्ण का कुरुक्षेत्र युद्ध | shree krishna leela | ramanand sagar | mahabharat कर्ण के विषय में कहा जाता है कि वह पाण्डवों का भाई है, पर यह विवाह से पहले उत्पन्न हुआ था इसलिए कुन्ती ने भी उसे अपना पुत्र स्वीकार नहीं किया था। पाठकों को याद होगा कि बाल्यावस्था में पाण्डवों और धृतराष्ट्र के पुत्रों की परीक्षा ली गई थी तो कर्ण को अर्जुन का प्रतिपक्षी बनने की आज्ञा नहीं दी गई थी क्योंकि वह हीन कुलोत्पन्न था। उसी दिन से उसने प्रण किया था कि किसी तरह अर्जुन को परास्त कर इस अपमान का बदला लूँगा। इसी अभिप्राय से उसने दुर्योधन से मित्रता पैदा की और उसको अपना सहायक ब...