श्री रामचन्द्र जी की जल समाधि
श्री रामचन्द्र जी की जल समाधि
श्री रामचन्द्र जी की जल समाधि | ramanand sagar | ramayan
श्री रामचन्द्र जी की जल समाधि | ramanand sagar | ramayan
लव कुश के अयोध्या में आने से राम आश्वस्त थे और उन्होंने समय से ही अपने दोनों बेटो और भाइयो में पुरे विश्व का भू भाग राज करने के लिए बाँट दिया. एक दिन दर्पण में अपना मुख देख उन्हें एहसास हुआ की अब उनका धरती पर आने का समय समाप्त हो चूका है और अब इस देह को छोड़ देना चाहिए इस बाबत उन्होंने नारद द्वारा यमराज को सन्देश भी भिजवाया।।।
नारद का सन्देश पा यमराज भी ठिठके लेकिन जो पैदा हुआ है उसे मरना ही होगा ये बाद याद कर वो अयोध्या की तरफ बढे श्रीराम से मिलने. यमराज ने ब्राह्मण का रूप धरा और श्रीराम के कक्ष के बहार पहरा दे रहे लक्ष्मण से राम से मिलने की इच्छा जताई, तब राम उन्हें लेने आये और दोनों बैठ के बात करने लगे.
ब्राह्मण रूपी यमराज ने अपना परिचय दिया और राम से कहा की अब में जो आपसे बताने जा रहा हूँ वो अगर कोई भी सुन लेगा तो वो तुरंत मर जायेगा, स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश भी इसे सुन दंड के भागी बन सकते है. इस पर राम लक्ष्मण के पास गए और किसी को भी किसी भी हालत में अंदर न आने देने को कहा और अगर लक्ष्मण ऐसा नही करेगा तो उसे प्राण दंड मिलने की चेतावनी भी दे आये
जब राम और यमराज बात कर रहे थे तभी दुर्वासा आ धमके और राम से मिलने की इच्छा जताई जिसे लक्ष्मण ने नही माना तब दुर्वासा ने लक्ष्मण को उसी दिन स्वर्ग सिधारने ( मरने)का श्राप दे दिया. तभी बहार वार्ता सुन राम पहुंचे और श्राप के बारे में जान दुखी हुए और दुर्वासा को भी प्रेम पूर्वक जाने को कह दिया. तब लक्ष्मण ने राम से आज्ञा ली और उसी समय जेक सरयू नदी में जल समाधी लेते हुए अपने प्राण त्यागे और इंद्रदेव उनकी आत्मा को लेने आये
अगले ही दिन राम ने भरत को बुलाया और राज्यभर सम्हालने के लिए कहा लेकिन भरत भी रो पड़े और राम के साथ जाने की जिद करने लगे ऐसा ही शत्रुधन ने किया दोनों ने अपने राज्य अपने पुत्रो को सम्हला दिए थे. तब राम ने भाइयो की जिद के आगे हाँ भारी और ऋषि वशिष्ठ को अपने स्वर्गलोक गमन की सुचना दी. उस दिन पूरा अयोध्या सरयू के किनारे जमघट लगाये राम को न जाने की विनती कर रहा था, लेकिन राम ने सबको समझा दिया.
तब पहले राम ने सरयू में डुबकी लगाई और जल समाधी ली, उनकी आत्मा वैकुण्ठ में जाके विष्णु में विलीन हो गई. भरत और शत्रुधन ने भी जल समाधी ली और इस प्रकार पुरे दशरथ पुत्रो को धरती से महाप्रयाण हो गया, लेकिन श्रीराम ने जो मर्यादा पुरषोतम का उदहारण दिया वो युगो युगो तो लोग अपनाके रखेंगे. प्रेम से बोलिए जय श्रीराम…
DIL KI AWAZ
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